Friday, April 3, 2009

ऐसे करें उम्‍मीदवार को अस्‍वीकार


लोकसभा चुनाव में अगर आपके क्षेत्र में ऐसे उम्‍मीदवार मैदान में है, जिन्‍हें आप अपने प्रतिनिधित्‍व के लायक नहीं समझते तो उसे अस्‍वीकार भी कर सकते हैं। निर्वाचन आयोग ने बकायदा प्रत्‍येक बूथ पर ऐसी व्‍यवस्‍था की है कि लोग मतदान पत्र पर अंकित उम्‍मीदवारों को अस्‍वीकृत कर सकता है। पिछले कई चुनावों से ऐसी व्‍यवस्‍था है लेकिन अब तक इसका  विशेष  प्रचार प्रसार नहीं हो सका। इस बार कुछ गैर सरकारी संस्‍थाओं के प्रयास से इस व्‍यवस्‍था को प्रकाश में लाया गया है। 
कैसें करें अस्‍वीकार
आमतौर पर मतदाता मतदान स्‍थल पर नहीं जाकर ही स्‍प ष्‍ट कर देते हैं कि वो उपलब्‍ध प्रत्‍याशियों में किसी को अपने प्रतिनिधित्‍व के लायक नहीं मानता। ऐसे में यह स्‍पष्‍ट नहीं होता कि उम्‍मीदवार को अस्‍वीकृत किया गया है अथवा मतदाता ने लापरवाही पूर्वक मतदान नहीं किया। अगर अपनी भावना को  प्रदर्शित करना है तो मतदाता को मतदान स्‍थल तक जाना होगा। बूथ के अंदर अपना नाम दर्ज कराना होगा, अंगुली पर निशान लगवाना होगा लेकिन जब इलेक्‍टानिक वोटिंग मशीन पर बटन दबाने की बात आए तो संबंधित अधिकारी को कह सकते हैं कि ''इनमें से मुझे किसी को वोट नहीं देना'' ऐसा कहने पर वहां रखे एक रजिस्‍टर में आपका नाम अंकित कर लिया जाएगा। चुनाव मतगणना के दौरान यह स्‍पष्‍ट हो जाएगा कि आपके क्षेत्र में कितने लोगों ने मतदान करने से इनकार कर दिया यानि उम्‍मीदवार उन्‍हें पसन्‍द नहीं थे। यह व्‍यवस्‍था किसी भी स्थिति में उम्‍मीदवार को नकारने की नहीं है, अगर आपके क्षेत्र के पचास फीसदी से अधिक लोग भी वोट देने से इनकार कर देंगे तो शेष का चुनाव वैध होगा। दरअसल हमारे देश में उम्‍मीदवार को नकारने की व्‍यवस्‍था नहीं है। हां, अगर हम वोट देने से इनकार करते रहे तो चुनाव व्‍यवस्‍था में यह परिवर्तन आ सकता है। फिलहाल आयोग के नियम 49 ओ के तहत वोट नहीं देने की व्‍यवस्‍था है। इसके जरिए हम अपनी भावना जता सकते हैं।
बांग्‍लादेश में नकार सकते हैं उम्‍मीदवार को
बांग्‍लादेश में अपने उम्‍मीदवार को नकार सकते हैं। वहां मतदान पत्र पर बकायदा एक ''अदृश्‍य उम्‍मीदवार'' होता है। यानि अगर पांच प्रत्‍याशी मैदान में है तो मतदान पत्र पर छह खाने होंगे। अगर आपको पांचों उम्‍मीदवारों में से कोई भी पसन्‍द नहीं आता तो आप छठे यानि ''अदृश्‍य उम्‍मीदवार'' को वोट दे सकेंगे। अगर ''अदृश्‍य उम्‍मीदवार'' को सर्वाधिक मत मिलते हैं तो  क्षेत्र में नए सिरे से मतदान होता है। ऐसे में शेष पांच स्‍वत ही किनारे हो जाते हैं।
स्‍वयंसेवी संस्‍थाओं  का प्रयास
दरअसल, देश की अनेक स्‍वयंसेवी संस्‍थाओं का प्रयास है कि ''अदृश्‍य उम्‍मीदवार'' की व्‍यवस्‍था भारत में भी लागू हो। अपने पक्ष को मजबूत करने के लिए ही इस व्‍यवस्‍था का भी प्रचार किया जा रहा है कि उम्‍मीदवार को पसन्‍द नहीं  करने वाले अपने घर पर बैठने के बजाय मतदान केंद्र पर पहुंचकर मतदान से इनकार करें। घर पर तो अनपढ और असमझ वाला व्‍यक्ति भी बैठता है।मतदान

7 comments:

निशाचर said...

अनुराग जी, आपने एक महत्त्वपूर्ण विषय उठाया है. मैं स्वयं भी इस पर एक पोस्ट लिखना चाह रहा था परन्तु आपने लिखकर उस काम को पूरा कर दिया है.
इस विषय में मैं एक और बात जोड़ना चाहता हूँ - इस बार चुनाव आयोग ने ऐसे मतदाताओं की सूची बनाने की विशेष व्यवस्था हर मतदान केंद्र पर की है. इसका मकसद "नकारात्मक वोट के अधिकार" हेतु सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका के पक्ष में इस सूची का इस्तेमाल करना है. अतः हर मतदाता को, जिसे ऐसा लगता है कि उसके चुनाव क्षेत्र का कोई भी उम्मेदवार उसकी आशाओं पर खरा नहीं उतरता, उसे घर बैठने के बजाय अपने इस अधिकार का इस्तेमाल करना चाहिए ताकि आगे आने वाले चुनावों में स्थिति बेहतर हो सके.

Yogendra Art Vibration said...

achi bat ye hai ki aap apne vicharo ko maqrne nahi de rahe ..unhe ujagar kar rahe hai bas ye nirantar rahe or aap or saskt vichar rakhe apne is samaj mai ..sadhu wad..
aap ka anuj
yogendra kumar purohit
M.F.A.
BIKANER,INDIA

संगीता पुरी said...

बहुत अच्‍छी जानकारी दी है आपने ... पर उम्‍मीदवार को नकारकर फिर से चुनाव के खर्च का बोझ ही तो डालना होगा देश पर।

Anurag Harsh said...

संगीता जी हम देश को बचाने के लिए सेना के नाम अरबों खरबों रुपए खर्च कर रहे हैं, घर में बैठे दुश्‍मनों से बचने के लिए भी कुछ खर्च हो जाए तो गम नहीं। आप इस मुद़दे पर विचार अवश्‍य करें।

satyaveer jain said...

anurag ji mein bhi kayi dino se ye soch raha tha ki mein iss baar no vote right ko use karunga abhi kuch dino pehle denik bhaskar mein is ke baare mein news ayi thi usi din mene kasam li ki jab tak iss desh se atankwad, berojgari, bhukhmari, secularism verses cummunalism, alpsankhyak tustikarn, aaj bharat mein atank wadi hamari logo ko aye din marte rehte hai lekin ye sale neta log waha Z+ security mein bethe sirh bhasan bazi karte rehate hai, karte dharte kuch hai nahi, jab tak janta ko Z+ security nahi milti, mera vote kisi bhi party ko nahi jayega ye kasam hai bharat mata ki, ya toh ye neta sudhre ya hum isse sudhardenge, is koi fark nahi parta ki mein akela iss mein kya kar paunga, jab humare rashtra pita mahatama gandhi dandi yatara par nikale the toh ve bhi akele the, abhi mere pass apne awaj uthane ka munch nahi hai lekin jab hoga toh desh ki raj ki neeti badal kar rakh dunga.......................

vandemataram

parveen said...

Hello Anurag ji.

Pranaam.

main Parveen Jaggi Chandigarh se likh raha hun. Main yahan ek Theatre Group "SANDLI PAIRAN KALA KENDER"chala rha hun aur hum logon ne bhi ye birra outhaya hai ki Voters ki ginti baddai jaye lekin agar aap ke area mein sahi ummeedwar nhi hai tou ouse asaveekar krna bhi aata ho. Eis ke ke liye hume aap ki jarurat hai. hum yahan Pamphlets print krva kar Colleges, University, Malls, Bazaar aur jahan bhi yuva voters mil saken unhe sachet karen. kya aap hame kuch simple points de sakte hain jis mein hum chahate hain ki "vote kyun dalen" aur " Voting ke phayde kya hain". hum apne prayaas se bhi points bana rahe hain lekin agar aap points de dein tou mil kar kuch badhiya kam ho jayega aur iss Bharat Mata ki Chhati se Bhrasstachry kuch tou kam krne ka prayaas hoga. mera email id hai: sandlipairan@yahoo.co.in aur themezntrendz@gmail.com.

App jo bhi kar rahe hain ous ke liye badhaai aur bhagwan aap ko har khashtra mein saffalata de.

danyawad.

aap ka Bhai

Parveen Jaggi
Gen. Secy.
SPKK, Chd.
+91-9873091049

सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi said...

यह जानकारी उतनी ही महत्‍वपूर्ण है जितने कि चुनाव। कई बार लोग पोलिंग केन्‍द्र तक नहीं जाने का यह भी बहाना बनाते हैं कि कोई भी उम्‍मीदवार ऐसा नहीं है जिसे वोट दिया जाए। ऐसे में यह व्‍यवस्‍था नकारात्‍मक रुख को भी काउंट करेगी।

यह जानकारी देने के लिए आभार।