Monday, April 13, 2009

शांत हैं, चुप नहीं

राजस्‍थान पत्रिका के 5 अप्रेल 2009 के रविवारीय में प्रकाशि
संसद में महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण देने की मांग करने वाली सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं के लिए सुखद तथ्य है कि चौदहवीं लोकसभा में महिला सांसदों का प्रदर्शन खराब नहीं रहा। न सिर्फ सवाल पूछकर सरकारी तंत्र में हलचल पैदा करने में बल्कि हर मुद्दे पर बहस करने वाली महिला सांसदों की संख्या भी चौंकाने वाली है। सबसे सुखद पहलू है कि जिन महिलाओं ने बेबाक होकर अपने क्षेत्र की बात रखी, उनमें अधिकांश नई थी। बड़ी नेत्रियों ने तो सवाल पूछने की जहमत तक नहीं उठाई। चौदहवीं लोकसभा समाप्त होने तक संसद में 46 महिला सांसद रही। इनमें अधिकांश ने अपने क्षेत्र के किसी न किसी मुद्दे पर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। महज बारह महिला सांसद ही ऐसी रही जिन्होंने एक भी सवाल संसद में नहीं किया। इसके विपरीत 18 महिला सांसदों ने इक्का-दुक्का नहीं बल्कि अपने क्षेत्र व देश से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर सवालों की बौछार कर दी। इन महिलाओं में प्रत्येक ने सौ से ज्यादा सवाल करते हुए तंत्र को झकझौरने का प्रयास किया। इतना ही नहीं महिलाओं ने विभिन्न मुद्दों पर बहस के दौरान भी हिस्सा लिया। बिहार के अराह लोकसभा क्षेत्र से निर्वाचित श्रीमती कांति सिंह को छोड़ दें तो देश की एक भी महिला सांसद ऐसी नहीं थी, जिन्होंने बहस में हिस्सा नहीं लिया हो। 45 सांसदों ने बहस में हिस्सा लेकर साबित कर दिया कि वो अपने विचारों से देश की सबसे बड़ी संसद को प्रभावित कर सकती है। हालांकि श्रीमती कांति सिंह ने भी छह विधायकों को पारित करने में हस्तक्षेप जरूर किया। इंदौर की भाजपा सांसद श्रीमती सुमित्रा महाजन, उड़ीसा की बीजेडी सांसद श्रीमती अर्चना नायक और कर्नाटक की सांसद डॉ. तेजस्वनी गौड़ा ने तो 70 से अधिक मुद्दों पर बहस करते हुए संशोधन की बात उठाई। हर बजट में रखी बात अर्थशास्त्री गुरुमुर्ति के इस कथन की पुष्टि संसद में भी होती है कि भारतीय अर्थ व्यवस्था में महिलाओं का विशेष हस्तक्षेप है। संसद में भले ही आम बजट रहा या फिर रेल बजट। महिला सांसदों ने अपनी बात जरूर रखी है। करीब अस्सी फीसदी महिला सांसदों ने बजट में कमी निकाली या फिर सुधार के लिए अपनी सलाह दी। नहीं बोली बड़ी नेता उम्मीद के विपरीत संसद में बड़ी महिला सांसदों ने अपना मुंह कम खोला। कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी, बंगाल की तेजतर्रार नेत्री ममता बनर्जी, कांग्रेस की पूर्व मंत्री रही रेणुका चौधरी, बिहार की श्रीमती मीरा कुमार, पी.ए. संगमा की बेटी कुमारी अगाथा के संगमा और कभी कांग्रेसी युवा महिला मंत्री रही अम्बाला सांसद कुमारी शैलजा के नाम से एक भी सवाल दर्ज नहीं है। मई 2008 में सांसद बनी अगाथा को छोड़ दें तो शेष को लम्बा समय संसद में मिला लेकिन कुछ मुद्दों पर बहस तक ही स्वयं को सीमित रखा। इन चेहरों ने किया प्रभावित फिल्म अभिनेता सुनील दत्त की लाडली प्रिया दत्त राजनीति में आई तो लगा कि वो कुछ कर गुजरने की मंशा रखती है। उन्होंने उम्मीद पर खरे उतरते हुए महाराष्ट्र, गरीबी और महिला सशक्तिकरण से जुड़े तीन सौ से अधिक सवाल संसद में रखे। संसद के आधे सत्र तक फिल्म अभिनेत्री श्रीमती पी. जयप्रदा नाहटा ने भी बाद में जोरदार उपस्थिति दर्ज कराई। 32 बार बहस में हिस्सा लिया और तीन सौ से अधिक सवाल किए। संसद में मनोनीत एंग्लो इंडियन सदस्य श्रीमती इंग्रीड मेक्लाड ने छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने एक सौ दस सवाल तो किए ही 18 आदिवासी महिलाओं के अपहरण का मुद्दा उठाकर समूचे सरकारी तंत्र को झकझौर दिया था। इन मुद्दों पर बेबाक बोली लोकसभा में महिला सांसदों ने ऐसे मुद्दों पर भी सदन का ध्यान आकृष्ट किया जिन पर कई विद्वान भी नहीं बोले। विशेषकर स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, श्रम और परिवार कल्याण के मुद्दों पर अधिकांश महिलाएं बोली। सबसे सकारात्मक बात यह रही कि जब जब रेल बजट जारी हुआ भारतीय महिलाओं ने अपने अपने क्षेत्र के लिए रेल की मांग जरूर रखी। यहां तक कि भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों का पालन नहीं होने और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे मुद्दों पर भी सांसद जमकर बोली। 
सवाल करने में टॉप 5 
1. श्रीमती निवेदिता माने (एनसीपी) महाराष्ट्र 2. संगीता देव सिंह (बीजेपी) उड़ीसा 3. श्रीमती जयाबेन बी ठक्कर (बीजेपी) गुजरात 4. श्रीमती मेनका गांधी (बीजेपी) उत्तरप्रदेश 5. श्रीमती पी. जयप्रदा नाहटा (समाजवादी पार्टी) उत्तरप्रदेश 

बहस में टॉप 5 
1. श्रीमती सी.एस. सुजाता (सीपीआई एम) केरल (92 मुद्दों पर बहस) 2. श्रीमती सुमित्रा महाजन (बीजेपी) मध्यप्रदेश (78 मुद्दों पर बहस) 3. श्रीमती अर्चना नायक (बीजेडी) उड़ीसा (78 मुद्दों पर बहस) 4. श्रीमती तेजस्वनी गौड़ा (कांग्रेस) कर्नाटक (77 मुद्दों पर बहस) 5. श्रीमती जयाबेन बी ठक्कर (बीजेपी) गुजरात (77 मुद्दों पर बहस)

4 comments:

राजीव जैन Rajeev Jain said...

bahut badiya

RAJIV MAHESHWARI said...

चुनाव के समय पर खूब बोलती है.
जितने के बाद चुप .....सिर्फ चुप .....

Anonymous said...

Anurag Bhai......... ladies special kaa shukriya. AAb kuch mardon ke bare me bhi likho jo parliament me shor machatae hai.

sagar

सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi said...

बहुत सुंदर दृष्टिकोण...