Saturday, June 27, 2009

संभल जाओ दुनिया वालों


केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्‍बल इन दिनों चर्चा में है। दो दिन तक लगातार देशभर के समाचार पत्रों में प्रथम लीड के रूप में प्रकाशित हुए। सिब्‍बल ने कुछ ऐसे ही निर्णय किए थे कि समाचार पत्र उन्‍हें फर्स्‍ट लीड से नीचे नहीं लगा सकते थे। पूर्व मानवसंसाधन मंत्री अर्जुन सिंह ने देश के ख्‍यात शिक्षाविद़ प्रो यशपाल की अध्‍यक्षता में जिस समिति का गठन किया था, उस समिति ने सिब्‍बल के समक्ष अपनी रिपोर्ट पेश की। तुरंत रिपोर्ट को सौ दिनों में लागू करने की घोषणा होते ही देश की उच्‍च शिक्षा को जैसे पंख लग गए। सरकारी स्‍तर पर हो रहे इस प्रयास की मैं सराहना करना चाहूंगा। पहली बार शिक्षा पर व्‍यापक द़ष्टिकोण के साथ सोचा गया है। विश्‍वविद्यालय अनुदान आयोग के चेयरमेन रहने के बाद स्‍वयं यशपाल ने महसूस कर लिया था कि इसकी उपयोगिता नहीं है। देश की उच्‍च शिक्षा को इस समय एक दिशा देने की आवश्‍यकता महसूस हो रही है। केंद्रीय स्‍तर पर एक ही आयोग स्‍थापित करने की सिफारिश कुछ विषमताओं को लिए हो सकती है लेकिन यूजीसी के साथ ही अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद़, चिकित्‍सा शिक्षा परिषद़ और राष्‍टीय अध्‍यापक शिक्षा परिषद़ की उपयोगिता पर सच में चिंतन की आवश्‍यकता है। देशभर में खुल रहे इंजीनियरिंग कॉलेज में गुणवत्‍ता पर अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद़ का कोई नियंत्रण नहीं है। इसी तरह पान की दुकान की तरह खुल रहे बीएड कॉलेज पर अध्‍यापक शिक्षा परिषद़ का कोई हस्‍तक्षेप नहीं दिखता। महज शुल्‍क वसूली करने और हर वर्ष कागजी कार्रवाई नए सिरे से शुरू करने की नीति इन बडे संस्‍थाओं की बन गई है। देश के आईआईटी और आईआईएम को विश्‍वविद्यालय का दर्जा देने की सोच नए माहौल में जरूरी है। यशपाल ने अपनी रिपोर्ट में यहां तक कहा है कि आईआईटी व आईआईएम के साथ ही अन्‍य विश्‍वविद्यालय भी अपना पाठ़यक्रम स्‍वयं तैयार करें और इसकी पुस्‍तकें भी वहीं के व्‍याख्‍याता लिखें। शिक्षा के क्षेत्र में नएपन की जरूरत महसूस हो रही है। यशपाल समिति के बाद दसवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा को समाप्‍त करके सीधे बारहवीं में बोर्ड स्‍थापित करने के प्रस्‍तावों को भी सभी सराह रहे हैं। विद्यार्थियों के दिमाग का बोझ कम होना चाहिए। साथ ही यह ध्‍यान रखना होगा कि विद्यालय स्‍तर पर होने वाली परीक्षाओं का स्‍तर सुधारा जाए।
कुछ दिन पहले अमरीकी राष्‍टपति बराक ओबामा ने अमरीकी युवाओं से कहा था कि वो तकनीकी क्षेत्र में अपना ज्ञान सुधारे नहीं तो भारतीय युवा सभी पर कब्‍जा कर लेंगे। जिस गति से देश में नयापन आ रहा है मैं तो कहूंगा अमरीका ही नहीं संभल जाओ  दुनिया वालो ।
आप क्‍या कहते हैं इससे शिक्षा में सुधार होगा या नहीं?